चन्द्रयान 3 - आज 40 बिलियन डॉलर के बाजार में प्रवेश करेगा भारत

और खौफ के वो 18 मिनट 

चन्द्रयान 3

आज शाम जब भारत में सूर्य अस्त होने की तैयारी कर रहा होगा तब पृथ्वी से लगभग तीन लाख चौरासी हजार किलोमीटर दूर चन्द्रमा पर 28 दिनों के बाद (पृथ्वी के दिनों के अनुसार) सूर्य उदय हो रहा होगा, और लगभग शाम के छः बजे चन्द्रयान -3 अपनी ऑर्बिट से 90 डिग्री घूमकर अपने चारों थ्रस्टर को स्टार्ट कर चन्द्रमा के दक्षिणी छोर पर उतरेगा ,100 गुना 25 की ऑर्बिट से चाँद की सतह पर आने में लगभग 18 मिनट का समय लगेगा , इस बीच चन्द्रयान -3 की गति को धीरे धीरे कम किया जायेगा जिससे की सेंसर को उपयुक्त लैंडिंग सरफेस को स्कैन करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकें और सॉफ्ट लैंडिंग के लिए थ्रस्टर की संख्या को सेंसर परिस्तिथियों के अनुरूप बंद कर सके, लैंडिंग की पूरी प्रक्रिया ऑटोमॅटिक होगी इसमें लैंडर को सही समय और ऊंचाई पर अपने इंजिन को चालू करना होगा , चन्द्रयान -3 पिछले कई दिनों से चन्द्रमा पर सूर्य उदय का इंतज़ार कर रहा था क्योंकि लैंडिंग के दौरान उसे अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ सकती है जो चन्द्रयान -3 के ऊपर लगे सोलर पैनल उसे सूर्य उदय होने पर ही दे सकते है, लैंडिंग के ये आखिरी 18 मिनट खौफ के 18 मिनट कहे जा रहे है क्योंकि चन्द्रयान -2 भी इन्ही अंतिम मिनट में क्रैश लैंडिंग कर गया था | 

40 बिलियन डॉलर के बाजार में प्रवेश करेगा भारत-

लांच व्हीकल LMV3 -M4
भविष्य में मून इकोनॉमी 40 बिलियन डॉलर की हो सकती है , भारत ने अपने लांच व्हीकल LMV3 -M4 से चन्द्रयान -3 को ऑर्बिट तक सफलता पूर्वक पहुँचाया है वो भी अमेरिका के लांच व्हीकल से कम खर्च पर , यही देखकर अमेज़ॉन के फाउंडर जेफ़ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन ने इसरो के LMV3 -M4 लांच राकेट के इस्तेमाल में अपनी रूचि दिखाई है , भविष्य में चाँद एक टूरिस्ट प्लेस बनेगा जिसके लिए स्पेस X जैसी कंपनी चाँद तक ट्रांसपोर्ट के लिए भरोसेमंद और सस्ता लॉन्चिंग रॉकेट तलाश रही है , भारत इसमें बड़ी कामयाबी हासिल कर सकता है | 

पृथ्वी से कही अधिक संवेदनशील है चन्द्रमा-

सभी विद्वान मानते है कि अगर मंगल ग्रह तक जाना है तो पहले चाँद पर अपनी सक्रिय उपस्थिति बनानी होगी चाँद का गुरुत्वाकर्षण भी पृथ्वी के मुकाबले काफी कम है चन्दमा पृथ्वी से बहुत अधिक संवेदनशील भी  है क्योंकि वहां पर अधिक संख्या में भूकंप आते रहते है जिनकी तीव्रता भी अधिक होती है उसके एक बड़े हिस्से यानि दक्षिणी भाग पर सूर्य किरणे नहीं आ पाती है जिसके कारण वहां पर हजारों वर्षों से बर्फ जमे होने की सम्भावना है , बर्फ होने के कारण ऑक्सीज़न और कार्बन डाई ऑक्साइड गैस भी होगी जिसमे जीवन के लक्षण होने की भी सम्भावना है | 

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