केदारनाथ त्रासदी के बाद -अब जोशीमठ हो रहा है तैयार
क्या अब जोशीमठ है खतरें में जोशीमठ में घरों में दरार पड़ी प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता विडाल दे ला ब्लॉश , फेब्रे , कुमारी सैम्पुल ने संभववाद की संकल्पना को जन्म दिया इसके अनुसार भूपटल पर हर जगह सम्भावना है कोई अनिवार्यता नहीं है मनुष्य इन सम्भावनाओ को चुनने के लिए स्वतंत्र है , लगता है उत्तराखंड सरकार ने भी उत्तराखंड में इसी संकल्पना को अपना लिया है इसीलिए केदारनाथ जैसी घटना के बाद भी अनियंत्रित निर्माण और बड़ी परियोजनाओं पर बेरोकटोक कार्य जारी है जिसका परिणाम अब जोशीमठ में सामने आ रहा है जोशीमठ के 562 घरों, दीवारों , पुलों और सड़कों में दरार पड़ गयी है लोगो का जीवन खतरें में है हजारों लोगों पुनर्वास की तरफ देख रहे है और सरकार से मदद मांग रहे है | 6000 फ़ीट से भी ऊँचे इस जोशीमठ शहर को हिमालय में बद्रीनाथ ,हेमकुंडसाहिब , फूलो की घाटी जैसे तीर्थस्थलों में जाने के लिए प्रवेश द्वार माना जाता है इस शहर को गेट वे ऑफ़ हिमालय भी कहते है , यह शहर भूकम्प के अत्यधिक जोखिम वाले जो...