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मई 31, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पानी से सेहत - एक प्राकृतिक निःशुल्क उपहार

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पानी के  साथ  सेहत  - एक प्राकृतिक निःशुल्क उपहार        स्वास्थ्य और पानी  -                             हमारे पूर्वज कहते थे कि स्वस्थ रहना है तो प्रकृति के साथ रहे ,ये ही बात वैदिक ग्रन्थों में भी कही गयी है , इसी बात को लेकर आज हम बात करते है पानी के पीने तरीके के बारे में, हममे से अधिकांश लोग पानी को एक ही सांस गटगट करके पी जाते है ग्रंथो के अनुसार ऐसा करके आप अनचाहे  ही आप पेट व् घुटनों की समस्या को निमंत्रण दे रहे है आदि सहिंताओं व् पूर्वजो के अनुसार पानी को एकबार एक घूंट मुँह में भर ले फिर उसे धीरे धीरे तीन बार छोटी छोटी  घूंट में बांटकर गले से  नीचे उतारे, और हमेशा याद रहे कि पानी पीते समय अपने घुटने मोड़कर बैठे कभी भी खड़े होकर पानी न पीयें , ऐसा करने से आप पेट व् घुटनों की समस्यांओ से काफी हद तक छुटकारा पा सकते है . पानी पीने का गलत तरीका  पानी पीने का सही तरीका     आर ओ  का पानी कितना सही-    ...

आ रहा है हिमयुग

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पृथ्वी पर आ रहा है हिमयुग             हिमयुग  का अर्थ -                              हिमयुग  का  अर्थ है कि धरातल पर बर्फ की मोटी चादर का  बिछ जाना,ऐसी दशा जिसमे लम्बे समय तक के लिए महाद्वीपों पर हिमानी व ग्लेशियर फैल जाये वायुमंडल में तापमान माइनस में पहुँच जाये और सर्दियों की अवधि बहुत लम्बी हो जाये ऐसे में चारों तरफ बर्फ ही बर्फ हो जाएगी  , बर्फ की ये परत कभी कभी तो वर्षो तक जमी रह सकती  है , इस प्रकार की परत पर किसी भी प्रकार की फसलें  नहीं उग पाती है जिसके कारण खाद्यान की बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है और मानव जीवन पर गंभीर संकट आ सकता है , खाद्य श्रृंखला भी प्रभावित होती है , पशु और पक्षियों पर भी जीवन का संकट आ जाता है     |                यूरोप में हिमयुग आगमन-                             ...

समन्वय, समायोजन - प्रकृति व् मानव

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 समन्वय ,समायोजन -प्रकृति  व् मानव                                                                  आज हम  आपकी नजर   अमेरिका मे घटी एक घटना की ओर ले जाना चाहते है  कि  कैसे प्रकृति की नाराजगी से उपजा कोरोना के कारण  संसार के सबसे बड़े विकसित देश में आर्थिक  कारणों से हो रहे प्रदर्शन से जॉर्ज नाम के एक प्रदर्शनकारी को पुलिस ने नियंत्रण करने के उद्देशय से पकड़ा लेकिन दुर्भाग्यवश उसकी मौत हो गयी ,जिसके बाद प्रदर्शनकारी उग्र हो उठे ,       मुद्दे की बात -                              असली बात अब शुरू होती है , पुलिस ने समन्वय व् सदभावना दिखाते हुए जिस प्रकार से माफी मांगी व् खेद प्रकट किया वो हम सबको एक सबक दे गया कि  हमे प्रकृति  के साथ वैसे समन्वय बैठाना है जैसे पुलि...