पांचवी और आठवीं कक्षा में असफल होने पर रोकने से सम्बंधित शासनादेश

पांचवी और आठवीं कक्षा में असफल होने पर रोकने से सम्बंधित शासनादेश  भारत सरकार 

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भारत सरकार द्वारा कक्षा 5वीं और 8वीं में छात्रों को अनुत्तीर्ण होने पर रोकने (Detention) से संबंधित निर्णय शिक्षा का अधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2019 (The Right of Children to Free and Compulsory Education (Amendment) Act, 2019) के तहत लिया गया है। इस संशोधन ने पुरानी 'नो डिटेंशन पॉलिसी' (किसी भी छात्र को फेल न करने की नीति) को समाप्त कर दिया है।

इस शासनादेश और कानून के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • नियमित परीक्षा: प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के अंत में कक्षा 5 और कक्षा 8 के लिए नियमित परीक्षा आयोजित की जाएगी।

  • पुनः परीक्षा का अवसर: यदि कोई छात्र इन परीक्षाओं में असफल होता है, तो उसे तत्काल फेल नहीं किया जाएगा। उसे दो महीने की अवधि के भीतर पुनः परीक्षा (Re-examination) का अवसर दिया जाएगा। इस दौरान छात्र को अतिरिक्त शिक्षण (Remedial Teaching) प्रदान किया जाएगा।

  • रोकने का प्रावधान (Detention): यदि छात्र पुनः परीक्षा में भी उत्तीर्ण नहीं हो पाता है, तो संबंधित राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकारी के पास यह अधिकार होगा कि वह उस छात्र को उसी कक्षा में रोक (Detain) सके। यानी अब 5वीं और 8वीं में फेल होने पर छात्र को अगली कक्षा में प्रोन्नत नहीं किया जाएगा।

  • राज्यों को अधिकार: केंद्र सरकार ने इस संशोधन के माध्यम से राज्य सरकारों को यह शक्ति दी है कि वे तय करें कि उन्हें अपने राज्य में छात्रों को रोकना है या नहीं। हालांकि, किसी भी छात्र को प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक स्कूल से निष्कासित (Expel) नहीं किया जा सकता।

इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना और छात्रों के सीखने के स्तर (Learning Outcomes) को सुनिश्चित करना है, ताकि बच्चे बिना सीखे केवल अगली कक्षा में न बढ़ते रहें।


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