NCERT की सामाजिक विज्ञान की किताब फिर विवादों में, इस बार ब्राह्मण समुदाय ने जताई कठोर आपत्ति

NCERT की सामाजिक विज्ञान की किताब फिर विवादों में, ब्राह्मण समुदाय ने जताई कठोर आपत्ति 


NCERT की किताबों में ऐतिहासिक तथ्यों की व्याख्या को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। ताजा विवाद का मुख्य केंद्र कक्षा 7 की इतिहास की पुस्तक 'हमारे अतीत-2' का एक चित्र और उससे जुड़ी व्याख्या है।

​विवाद का मुख्य कारण

​विवाद उस चित्रण को लेकर है जिसमें दिखाया गया है कि ब्राह्मण भारत के प्राचीन धर्मशास्त्र अंग्रेजों (ब्रिटिश सत्ता) को सौंप रहे हैं। किताब में जेम्स रेननेल द्वारा 1782 में तैयार किए गए एक चित्र के हवाले से यह तर्क दिया गया है कि भारतीय ब्राह्मणों ने स्वेच्छा से अपने शास्त्र अंग्रेजों को भेंट किए ताकि वे भारत की सांस्कृतिक परंपराओं के रक्षक बन सकें।

हिममेधा 

क्यों कर रहा हैं ब्रहामण समुदाय विरोध -

  • इतिहास के साथ छेड़छाड़: आलोचकों और कई सामाजिक संगठनों का तर्क है कि यह चित्रण ऐतिहासिक रूप से भ्रामक है। उनका कहना है कि ब्राह्मणों ने कभी भी शास्त्र 'सौंपे' नहीं थे, बल्कि अंग्रेजों ने कूटनीति और बल के माध्यम से इनका अध्ययन किया ताकि वे भारत पर शासन करने के लिए यहाँ की कानूनी और सामाजिक व्यवस्था को समझ सकें।
  • मानसिक दासता का आरोप: सोशल मीडिया और शैक्षणिक हलकों में यह बहस छिड़ी है कि इस तरह के चित्रण नई पीढ़ी के मन में यह धारणा बिठाते हैं कि भारतीय समाज ने ब्रिटिश हुकूमत को खुद आमंत्रित किया था।
  • गलत व्याख्या: विरोध करने वालों का मानना है कि जेम्स रेननेल का वह चित्र एक 'औपनिवेशिक प्रोपेगेंडा' था, जिसे NCERT ने बिना किसी आलोचनात्मक टिप्पणी के तथ्य के रूप में पेश कर दिया।




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