सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश- '2 साल के भीतर पास करना होगा UPTET या CTET
 |
हिममेधा
उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का हालिया रुख बेहद महत्वपूर्ण है। यह आदेश विशेष रूप से उन 1.86 लाख शिक्षकों की चिंताओं को बढ़ाने वाला है जो लंबे समय से बिना पात्रता परीक्षा (UPTET) उत्तीर्ण किए अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक स्तर पर अध्यापन के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) एक अनिवार्य योग्यता है। कोर्ट ने उन शिक्षकों को राहत के बजाय चेतावनी दी है जो सालों से बिना इस अर्हता के कार्यरत थे। अब उनके पास अपनी योग्यता साबित करने के लिए अधिकतम 2 वर्ष का समय है।
1.86 लाख शिक्षकों पर प्रभाव- यह आदेश मुख्य रूप से उन 'शिक्षामित्रों' और संविदा शिक्षकों को प्रभावित करता है जो पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान नियमित किए गए थे या विशेष नियुक्तियों के तहत सिस्टम में आए थे।
नौकरी पर संकट: यदि ये शिक्षक निर्धारित 2 वर्षों के भीतर UPTET या CTET पास नहीं कर पाते हैं, तो उनकी सेवाओं को समाप्त किया जा सकता है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: न्यायालय का तर्क है कि बच्चों को योग्य शिक्षकों से पढ़ने का संवैधानिक अधिकार है और पात्रता मानकों पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
मानसिक तनाव: इस आदेश के बाद शिक्षकों में हड़कंप है, क्योंकि एक बड़ी संख्या उन शिक्षकों की है जिनकी उम्र अधिक हो चुकी है और उनके लिए दोबारा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना चुनौतीपूर्ण होगा।
निष्कर्ष- सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, यह उन 1.86 लाख परिवारों के लिए आजीविका का संकट भी खड़ा कर सकता है जो पूरी तरह से इन नौकरियों पर निर्भर हैं। अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है कि वह इन शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण या कोचिंग की व्यवस्था कैसे करती है ताकि वे इस समय सीमा के भीतर अर्हता प्राप्त कर सकें।
|
YOU MAY ALSO LIKE IT-
 |
| आपकी छोटी सी मदद उनकी मुस्कान बन सकती है जरूरतमंद छात्रों की सहायता के लिए कृपया डोनेट करें |
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
please do not enter any spam link in the comment box.