जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी अब शिक्षकों के बच्चों के लिए 5% आरक्षण की घोषणा
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हिममेधा
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अपने शिक्षकों के बच्चों के लिए विशेष प्रवेश आरक्षण की घोषणा की है। यह कदम विश्वविद्यालय की नीति में एक बड़े बदलाव को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य परिसर में कार्यरत शैक्षणिक समुदाय के कल्याण को बढ़ावा देना है। यहाँ इस निर्णय का विस्तृत विवरण और विश्लेषण दिया गया है:
JNU प्रशासन ने शिक्षकों के बच्चों के लिए 5% सीटों का आरक्षण निर्धारित किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सुविधा पहले केवल विश्वविद्यालय के गैर-शिक्षण कर्मचारियों (Non-teaching staff) के बच्चों के लिए उपलब्ध थी। अब, शिक्षकों के बच्चों को भी उसी श्रेणी में शामिल कर लिया गया है, जिससे उन्हें प्रवेश प्रक्रिया में समान लाभ मिलेगा।
इस प्रस्ताव को 15 अप्रैल 2026 को JNU की कार्यकारी परिषद (Executive Council) द्वारा अंतिम मंजूरी दी गई। इससे पहले मार्च में शैक्षणिक परिषद ने भी इसे अपनी सहमति दी थी।
समय सीमा:यह नया नियम वर्तमान शैक्षणिक सत्र से ही लागू हो जाएगा। इसका अर्थ है कि इस वर्ष की प्रवेश परीक्षाओं में बैठने वाले छात्र तुरंत इस कोटे का लाभ उठा सकेंगे
यद्यपि यह एक विशेष आरक्षण है, लेकिन विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि मानक प्रक्रियाओं में कोई ढिलाई नहीं दी जाएगी:
1. CUET और NET अनिवार्य: स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) के लिए CUET तथा पीएचडी के लिए NET/JRF जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना अभी भी अनिवार्य है।
2. पात्रता मानदंड: केवल आरक्षण के आधार पर सीधे प्रवेश नहीं मिलेगा; छात्रों को संबंधित पाठ्यक्रम के लिए आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी करनी होगी।
यह निर्णय उन शिक्षक परिवारों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आया है जो लंबे समय से इस तरह के प्रावधान की मांग कर रहे थे। कई अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों (जैसे DU या BHU) में कर्मचारियों के बच्चों के लिए इसी तरह की व्यवस्था पहले से मौजूद है।
JNU का यह कदम आंतरिक रूप से काफी प्रभावशाली है। जहाँ एक ओर यह शिक्षकों के योगदान को मान्यता देता है और उनके परिवारों को सुरक्षा प्रदान करता है, वहीं दूसरी ओर यह अकादमिक जगत में एक नई चर्चा को भी जन्म देता है कि क्या इस तरह के कोटे से सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए उपलब्ध सीटों पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ेगा। बहरहाल, प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के बीच समानता लाने का एक प्रयास है।
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