विवादित पुस्तक एक्सप्लोरिंग सोसाइटी : इंडिया एंड बियॉन्ड पर मांगी माफ़ी, पूरी किताब हुई वापस
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हिममेधा
शैक्षणिक उत्तरदायित्व की मिसाल: एनसीईआरटी का सुधारात्मक कदम
हाल ही में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' (Exploring Society: India and Beyond) को जारी करने के तुरंत बाद पूरी तरह वापस लेने और इसके पाठ 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका' में विवादास्पद सामग्री के लिए "बिना शर्त और अयोग्य" माफी मांगने का निर्णय, भारतीय शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही का एक अत्यंत महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह कदम केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि देश की संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान और युवा मतिष्क को परोसी जाने वाली शिक्षा की शुचिता को बनाए रखने की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। विवाद का मुख्य कारण पुस्तक में न्यायपालिका, विशेषकर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्तियों और कार्यप्रणाली को लेकर की गई टिप्पणियां थीं। विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों के अनुसार, यह चित्रण न केवल तथ्यात्मक रूप से भ्रामक था, बल्कि लोकतंत्र के रक्षक और संविधान के अंतिम व्याख्याकार के रूप में न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला भी था। शिक्षा का मूल उद्देश्य छात्रों में आलोचनात्मक सोच विकसित करना है, न कि आधारहीन तर्कों के माध्यम से सर्वोच्च संस्थाओं के प्रति अविश्वास या नकारात्मकता का भाव पैदा करना। एनसीईआरटी ने अपनी गलती को त्वरित गति से स्वीकार कर और पूरी किताब को बाजार व स्कूलों से वापस मंगाकर एक उच्च मानक स्थापित किया है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता, वैचारिक निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यह घटना भविष्य के लिए एक कड़ा सबक है कि पाठ्यपुस्तकों के निर्माण और समीक्षा की प्रक्रिया अत्यंत गंभीर, पारदर्शी और विशेषज्ञतापूर्ण होनी चाहिए। एनसीईआरटी का यह सुधारात्मक कदम शिक्षा जगत में विश्वास बहाली और राष्ट्र के वैचारिक भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक स्वागत योग्य और अनुकरणीय पहल है।
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