सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026: रीचेकिंग (Rechecking), मूल्यांकन और नए नियमों की विस्तृत जानकारी
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026: रीचेकिंग (Rechecking), मूल्यांकन और नए नियमों की विस्तृत जानकारी
![]() |
| सीबीएसई |
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2026 की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए मूल्यांकन (Evaluation), कॉपी चेकिंग और रीचेकिंग (Re-evaluation) की प्रक्रिया में ऐतिहासिक और बड़े बदलाव किए हैं।
नीचे 2026 से लागू होने वाले रीचेकिंग, ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) और उत्तर लेखन के नए नियमों की विस्तृत और सटीक जानकारी दी गई है।
. रीचेकिंग (Rechecking) और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया का नया क्रम
CBSE ने परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद की गतिविधियों (Post-Result Activities) के क्रम में एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। पहले छात्रों को मार्क्स वेरिफिकेशन (सत्यापन) के लिए आवेदन करना होता था, और उसके बाद ही वे अपनी कॉपी की फोटोकॉपी प्राप्त कर सकते थे। लेकिन अब इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बना दिया गया है।
मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी अनिवार्य: नए नियमों के अनुसार, यदि कोई छात्र अपने अंकों से असंतुष्ट है और रीचेकिंग या पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) करवाना चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपनी जांची गई उत्तर पुस्तिका (Evaluated Answer Book) की फोटोकॉपी प्राप्त करनी होगी।
पारदर्शिता में वृद्धि: छात्र सबसे पहले यह देख सकेंगे कि उनके किस उत्तर पर कितने अंक दिए गए हैं और शिक्षक ने कहां नंबर काटे हैं। यदि उन्हें पुख्ता रूप से लगता है कि किसी सही उत्तर पर कम अंक मिले हैं या कोई प्रश्न जांचने से छूट गया है, केवल तभी वे रीचेकिंग के लिए आगे का आवेदन कर सकेंगे।
अनावश्यक रीचेकिंग में कमी: इस कदम से उन छात्रों का कीमती समय और पैसा बचेगा जो केवल संदेह के आधार पर या भाग्य आजमाने के लिए रीचेकिंग का फॉर्म भरते थे।
2. कक्षा 12 के लिए 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (On-Screen Marking - OSM) प्रणाली
2026 से CBSE कक्षा 12वीं की 1 करोड़ से अधिक बोर्ड कॉपियां मैन्युअल तरीके (शिक्षकों द्वारा पेन से) नहीं जांची जाएंगी।
यह सिस्टम 7 चरणों में कैसे काम करेगा?
स्कैनिंग: परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्रों की भौतिक (Physical) उत्तर पुस्तिकाओं को हाई-क्वालिटी स्कैनर के जरिए स्कैन करके सुरक्षित डिजिटल फाइल में बदल दिया जाएगा।
डिजिटल चेकिंग: शिक्षकों को भारी कॉपियों के बंडल लेकर किसी दूर के इवैल्यूएशन सेंटर पर जाने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने स्कूल के सुरक्षित कंप्यूटर लैब में IP-restricted लॉगिन के जरिए कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपियां जांचेंगे।
ऑटो-टोटलिंग (Auto-Totaling): शिक्षक स्क्रीन पर उत्तर पढ़ेंगे और सॉफ्टवेयर में अंक दर्ज करेंगे। अंकों का जोड़ (Totaling) सॉफ्टवेयर खुद करेगा।
रीचेकिंग पर OSM का सीधा प्रभाव:
टोटलिंग एरर खत्म (No Totaling Errors): सीबीएसई में रीचेकिंग के 90% से अधिक मामले टोटलिंग में हुई मानवीय गलतियों के कारण आते थे (जैसे 4+4 को गलती से 7 लिख देना)।
क्योंकि अब यह काम कंप्यूटर करेगा, इसलिए टोटलिंग में गलती होने की संभावना 0% हो जाएगी। कोई प्रश्न नहीं छूटेगा: इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब तक शिक्षक हर एक प्रश्न पर अंक या 'NA' (Not Attempted) दर्ज नहीं कर देता, तब तक कॉपी सिस्टम में सबमिट ही नहीं होगी। इससे "मेरा एक उत्तर बिना जांचे छूट गया" जैसी शिकायतें पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।
अंकों में बदलाव की गुंजाइश शून्य: CBSE के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड का लक्ष्य "जीरो एरर" मूल्यांकन है। इस सिस्टम के बाद, यदि कोई छात्र वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करता है, तो उसके अंकों में बदलाव (No change in awarded marks) होने की गुंजाइश न के बराबर होगी।
3. कक्षा 10 के लिए "सेक्शन-वाइज" उत्तर लेखन का सख्त नियम (और रीचेकिंग पर इसका असर)
कक्षा 10वीं की परीक्षा (विशेषकर विज्ञान और सामाजिक विज्ञान) के लिए उत्तर लेखन को लेकर 2026 से बहुत सख्त नियम लागू किए गए हैं, जिसका सीधा असर मूल्यांकन और रीचेकिंग पर पड़ेगा।
विषय के अनुसार अलग सेक्शन: * विज्ञान (Science): प्रश्नपत्र तीन खंडों में बंटा होगा—खंड 'A' जीव विज्ञान (Biology), खंड 'B' रसायन विज्ञान (Chemistry), और खंड 'C' भौतिक विज्ञान (Physics)।
छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका में भी इन तीनों के लिए अलग-अलग सेक्शन बनाने होंगे। सामाजिक विज्ञान (Social Science): इसे चार खंडों में बंटा गया है—इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, और अर्थशास्त्र।
गलत सेक्शन में उत्तर लिखने पर शून्य (0) अंक: यदि किसी छात्र ने जीव विज्ञान का उत्तर गलती से भौतिक विज्ञान वाले सेक्शन में लिख दिया, तो उस उत्तर को जांचा नहीं जाएगा। हर विषय का शिक्षक केवल अपना सेक्शन जांचेगा।
रीचेकिंग में भी कोई रियायत नहीं: बोर्ड ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि उत्तर गलत जगह लिखा गया है, तो रीचेकिंग या पुनर्मूल्यांकन के दौरान भी उन उत्तरों पर कोई अंक नहीं दिए जाएंगे, भले ही उत्तर वैज्ञानिक रूप से 100% सही क्यों न हो।
4. कक्षा 10 के लिए "दो बोर्ड परीक्षा" (Two Board Exams) का नया विकल्प
2026 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए साल में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित की जाएगी।
पहला प्रयास (अनिवार्य): यह मुख्य परीक्षा फरवरी/मार्च में आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी छात्रों का बैठना अनिवार्य है।
दूसरा प्रयास (वैकल्पिक): यह परीक्षा मई के महीने में होगी।
रीचेकिंग का बेहतरीन विकल्प क्यों? पहले छात्र अपने कम अंकों से निराश होकर रीचेकिंग का सहारा लेते थे, जिसमें अंक बढ़ने की कोई गारंटी नहीं होती थी। अब, यदि कोई छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं है, तो वह रीचेकिंग पर पैसे और समय बर्बाद करने के बजाय सीधे मई में होने वाली दूसरी परीक्षा (Improvement Exam) में बैठ सकता है।
दोनों परीक्षाओं में से जिसमें भी अंक ज्यादा होंगे (Best of Two), उसे ही फाइनल रिजल्ट माना जाएगा।
5. सुरक्षा, पारदर्शिता और UFM (Unfair Means) के कड़े नियम
बोर्ड ने परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ अन्य सख्त कदम भी उठाए हैं:
समय की ट्रैकिंग (Time Tracking): डिजिटल चेकिंग के दौरान सिस्टम यह रिकॉर्ड करेगा कि परीक्षक (Evaluator) ने एक कॉपी को जांचने में कितना समय लगाया है। जल्दबाजी में कॉपी जांचने वाले शिक्षकों को सिस्टम तुरंत फ्लैग कर देगा।
अफवाहों पर FIR: रीचेकिंग, पेपर लीक या मूल्यांकन को लेकर YouTube या WhatsApp पर फर्जी खबरें और भ्रामक लिंक फैलाने वालों पर साइबर पुलिस पैनी नजर रखेगी।
छात्रों पर कार्रवाई: यदि कोई छात्र किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने या भ्रामक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उस पर 'अनफेयर मीन्स' (UFM) के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी और उसका रिजल्ट रद्द किया जा सकता है।
6. डिजिटल चेकिंग के दौर में छात्रों के लिए आवश्यक टिप्स
चूंकि 12वीं की कॉपियां स्क्रीन पर स्कैन होकर जांची जाएंगी और 10वीं के नियम सख्त हो गए हैं, इसलिए परीक्षा देते समय इन बातों का ध्यान रखें:
डार्क पेन का इस्तेमाल करें: स्कैनिंग के दौरान हल्का रंग स्क्रीन पर ठीक से कैप्चर नहीं होता। हमेशा डार्क ब्लू (Dark Blue) या काले (Black) बॉल पॉइंट/जेल पेन (0.7mm) का इस्तेमाल करें।
स्पष्टता और स्पेसिंग: दो उत्तरों के बीच कम से कम दो लाइनों का गैप छोड़ें। स्क्रीन पर बहुत ज्यादा घना लिखा हुआ टेक्स्ट पढ़ने में शिक्षकों को परेशानी होती है।
डायग्राम: विज्ञान या भूगोल के डायग्राम हमेशा डार्क पेंसिल (HB) से बनाएं ताकि स्कैनर उन्हें स्पष्ट रूप से पढ़ सके।
हाइलाइटिंग: अपने मुख्य पॉइंट्स या गणित के फाइनल आंसर को बॉक्स में बंद करें, ताकि डिजिटल चेकिंग के दौरान परीक्षक की नजर सीधे आपके सही उत्तर पर पड़े।
निष्कर्ष:
2026 का वर्ष CBSE के मूल्यांकन इतिहास में एक बहुत बड़ा बदलाव लेकर आ रहा है। जहां ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम 12वीं की कॉपी चेकिंग को मानवीय गलतियों से मुक्त करेगा, वहीं 10वीं के लिए दो बोर्ड परीक्षा नीति छात्रों को रीचेकिंग की अनिश्चितता से बचाकर अपने अंक सुधारने का सीधा मौका देगी।
YOU MAY ALSO LIKE IT-
![]() |
| आपकी छोटी सी मदद उनकी मुस्कान बन सकती है जरूरतमंद छात्रों की सहायता के लिए कृपया डोनेट करें |
- उत्तराखण्ड में शिक्षकों को दुर्गम की सेवाओं का दोगुना लाभ मिलना शुरू
- इस पड़ौसी राज्य में अब सहायक अध्यापक भी बन सकेंगे प्रधानाचार्य
- प्रोजेक्ट कार्य सामाजिक विज्ञान- यूरोप में समाजवाद और रुसी क्रांति
- सीबीएसई परीक्षा में स्कूल ने गलती से छात्रा को दे दिए जीरो मार्क्स, अब कोर्ट ने लगाया 30 हजार रूपये का जुर्माना
- उत्तराखण्ड बोर्ड ने घोषित की प्रैक्टिकल और बोर्ड परीक्षा की डेट



टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
please do not enter any spam link in the comment box.