जसपाल राणा का निधन: भारतीय निशानेबाजी का एक युग समाप्त
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हिममेधा
प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज कोच और पूर्व एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता जसपाल राणा का १२ जून २०२६ को ४९ वर्ष की आयु में निधन हो गया। राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव के अनुसार, उन्होंने एक दिन पहले रात में आखिरी सांस ली।
उत्तरकाशी में २८ जून १९७६ को जन्मे जसपाल राणा ने मात्र १८ वर्ष की उम्र में १९९४ एशियाई खेलों में २५ मीटर सेंटर फायर पिस्टल में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में १५ पदक (९ स्वर्ण) जीते, जो भारतीय एथलीट्स में रिकॉर्ड है। २००६ दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने तीन स्वर्ण और एक रजत पदक हासिल किए तथा विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की।
प्रतियोगिता से कोचिंग में आए जसपाल राणा ने मनु भाकर, सौरभ चौधरी जैसी नई पीढ़ी को तैयार किया। खासकर मनु भाकर के साथ उनका रिश्ता २०२४ पेरिस ओलंपिक में भारत की पहली ओलंपिक शूटिंग पदक (दो कांस्य) दिलाने में अहम रहा।
राणा का जाना न केवल एक कोच या खिलाड़ी का खोना है, बल्कि भारतीय निशानेबाजी की उस जज्बे और अनुशासन का नुकसान है जो उन्होंने दशकों तक जीवंत रखा। उनकी मेहनत, जुनून और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।
भारतीय खेल जगत एक सच्चे योद्धा को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। जसपाल राणा अमर रहें।
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