आरक्षण का दुष्परिणाम भुगतते सामान्य श्रेणी के युवा
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मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा कृषि विभाग में सहायक संचालक के 71 पदों पर की गई भर्ती एक बड़े विवाद में फंस गई है। विवाद का कारण: याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में 100 प्रतिशत आरक्षण लागू हो गया है, जिससे सामान्य (General) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए एक भी पद खाली नहीं बचा।
आरक्षण का गणित: याचिका में कहा गया है कि 27% ओबीसी आरक्षण को केवल विज्ञापित पदों के बजाय पूरे कैडर (368 पद) पर लागू कर दिया गया, जिससे आरक्षण का संतुलन बिगड़ गया।
कोर्ट की टिप्पणी: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर मुख्यपीठ के न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ ने 100% आरक्षण की स्थिति पर हैरानी जताई है।
सरकार से जवाब:कोर्ट ने राज्य सरकार और आयोग से इस मामले पर जवाब मांगा है। हालांकि, फिलहाल भर्ती पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है।
अगली सुनवाई:इस मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होनी तय हुई है।
यह मामला प्रदेश में आरक्षण नीति के क्रियान्वयन और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन को लेकर एक नई बहस का केंद्र बन गया है।
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